11 May 2005

क्षणिकाएँ

  • बरसात

हमारे यहाँ तो
बारहों महीने
रहती है बरसात
घर में बीवी
और
दफ्तर में साहब
बरसते हैं दिन-रात

--000--


  • यादें

तुम्हारी यादें
सुरक्षित हैं
गैस कांड की तरह
और तुम
गायब हो
मुआवजे की तरह
--000--

  • डैड


    सभ्यता में

    आजकल लोग
    कैसे हो गए
    जिंदा पिता भी
    अब
    डैड हो गए
    --000--

  • केक्टस सभ्यता


    कैसे कैसे
    चलन हो गए
    कैसी हो गई
    नेक चलनी
    भूल गए तुलसी गुलाब
    लगाते हैं लोग
    नागफनी
    --000--

:: डॉ॰ शरद जैन ::

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